वनजीवी राम
रामनवमी के अवसर पर विषेश..... वनजीवी राम तमाम बिडंबनाओं के बावजूद हमें राम, कृश्ण और षिव की प्रचलित कथायें सदैव प्रभावित करती रही हैं। इन कथाओं के अलावा दुनिया के लोग षायद ही किसी दूसरी कथा को जानते होंगे जो इन कथाओं के मर्म को फलांग सके. इन कथाओं के अपूर्व होने पर किसी को भी सन्देह नहीं. राम का वनवासी रूप हमें आज के भौतिकवादी समय में जितना प्रभावित करता है उतना किसी और कथा पात्र का कोई कथा रूप नहीं। इसका आषय यह नहीं कि राम के दूसरे कथारूप प्रभावित नहीं करते। कथा पढ़ते या सुनते ही सांसें फूलने लगती हैं। अचरज लगता है कि क्या राम जैसा कोई हो सकता जो मर्यादा के बंधन में खुद को जकड़ ले क्योंकि बंधन कुदरती नहीं होता है, व्यक्ति सदैव स्वतंत्र रहने का आकांक्षी होता है। यह बात अलग है कि उसकी स्वतंत्रतायें बाधित या छीन ली जायें, जैसा कि हुकूमतें हर काल में करती रही हैं. पर राम हैं कि मर्यादा को अपने आचरण का हिस्सा बना लेते हैं बिना किसी बनावट के सामान्य रूप से, यह जो मर्यादा का राम के आचरण में विलीनकरण है बिना किसी आरोपण के वह राम कथा को अपूर्व बना देता है। मानव सभ्यता के विकास क्रम में कोई ...